पसली फ्रैक्चर के इलाज के लिए सही अस्पताल का चुनाव कैसे करें?

छाती चोट में दुर्घटना होने पर छाती चोट के मरीज हमेषा किसी ऐसे बड़े अस्पताल में जायें जहाँ पर किसी थोरेसिक सर्जन की चैबीस घंटे उपलब्धता हो और अत्याधुनिक आई. सी. यू. की सुविधा हो जिसमें कृत्रिम ष्वास यंत्र यानि वेन्टीलेटर की प्रचुर मात्रा में उपलब्धता हो। हमारे देष में देखा गया है कि तथाकथित बड़े अस्पताल के आई. सी. यू. में कृत्रिम ष्वास यंत्रों की संख्या नगण्य व नाम मात्र की होती है। इसका परिणाम यह होता है कि तुरंत जरूरत पड़ने पर मरीज को वेन्टीलेटर की सुविधा न मिलने पर उसकी हालत गंभीर हो जाती है और वह षनैः षनैः दम तोड़ देता है। आई. सी. यू. में प्रति दो षैयायों के बीच एक वेन्टीलेटर (कृत्रिम ष्वास यंत्र) की उपलब्धता होना अत्यन्त आवष्यक है। आई. सी. यू. में ष्क्रिटिकल केयर इन्टेंसिविस्ट की टीम का उपलब्ध होना पसली फ्रैक्चर के इलाज में बड़ा कारगर सिद्ध होता है। साथ ही साथ अस्पताल में प्रवेष करने के पहले यह भी जानकारी प्राप्त कर लें कि वहाँ फेफड़े की सर्जरी नियमित रूप से होती है या नहीं। यह भी जानना जरूरी है कि उस अस्पताल में अत्याधुनिक जाँच सुविधायें जैसे मल्टी स्लाइड सी.टी., एम. आर. आई., ब्रान्कोस्कोपी, थोरेकोस्कोपी एवं इकोकार्डियोग्राफी व पल्मोनरी एंजियोग्राफी हैं या नहीं।

Read more…

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Call Us Now
WhatsApp