कभी भी पसली के फ्रैक्चर में छाती पर टाइट कपड़ा या प्लास्टर न लगायें

हमारे देष में पसलियों का फ्रैक्चर होने पर ज्यादातर मरीज हड्डी रोग विषेशज्ञ के पास पहुँच जाते हैं। इसके दो नुकसान होते हैं। एक तो इलाज के लिए मिला हुआ बहुमूल्य समय वह गंवा देते हैं, दूसरा घायल हुए फेफड़े का सही आंकलन नहीं हो पाता जिससे जान जाने का खतरा रहता है और तीसरा पसली चोट में होने वाले दर्द से बचने के लिए छाती के ऊपर टाइट कपड़ा बाँध दिया जाता है या ल्यूकोप्लास्ट या डायना प्लास्ट छाती पर चिपका दिया जाता है या कभी कभी छाती पर प्लास्टर तक कर दिया जाता है। लोग यह नहीं जानते ऐसा करने से मरीज को फायदा पहुँचने की बजाय उसका और नुकसान हो जाता है। छाती पर पड़ने वाले बाहरी दबाव के कारण पहले से ही ज़ख्मी पड़ा हुआ फेफड़ा ठीक तरह से फूल नहीं पाता जिसकी वजह से या तो फेफड़ा सिकुड़ जाता है या फेफड़े में न्यूमोनिया पैदा होने की संभावना बढ़ जाती है जिसके परिणामस्वरूप मरीज की साँस लेने की क्रिया बाधित हो जाती है और मरीज की जान का खतरा पैदा हो जाता है।

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