October 2026

पसली फ्रैक्चर के इलाज के लिए सही अस्पताल का चुनाव कैसे करें?

छाती चोट में दुर्घटना होने पर छाती चोट के मरीज हमेषा किसी ऐसे बड़े अस्पताल में जायें जहाँ पर किसी थोरेसिक सर्जन की चैबीस घंटे उपलब्धता हो और अत्याधुनिक आई. सी. यू. की सुविधा हो जिसमें कृत्रिम ष्वास यंत्र यानि वेन्टीलेटर की प्रचुर मात्रा में उपलब्धता हो। हमारे देष में देखा गया है कि तथाकथित

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कभी भी पसली के फ्रैक्चर में छाती पर टाइट कपड़ा या प्लास्टर न लगायें

हमारे देष में पसलियों का फ्रैक्चर होने पर ज्यादातर मरीज हड्डी रोग विषेशज्ञ के पास पहुँच जाते हैं। इसके दो नुकसान होते हैं। एक तो इलाज के लिए मिला हुआ बहुमूल्य समय वह गंवा देते हैं, दूसरा घायल हुए फेफड़े का सही आंकलन नहीं हो पाता जिससे जान जाने का खतरा रहता है और तीसरा

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अगर आपको पसली का फ्रैक्चर है तो क्या करें?

छाती चोट या पसली का फ्रैक्चर का संदेह होने पर तुरंत किसी अनुभवी थोरेसिक यानि चेस्ट सर्जन से संपर्क करें और छाती का एक्सरे करायें। आजकल के युग में छाती का एक्सरे सबसे सस्ती, सबसे महत्त्वपूर्ण और सबसे उपयोगी जाँच है जिससे तुरंत इलाज की आगे की दिषा निर्धारित करने में मदद मिलती है और

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पसलियों के फ्रैक्चर को पहचाने कैसे?

Read more… Dr. K K PandeyDr. K. K. Pandey is a Senior Consultant in Thoracic & Endothoracic Surgery at Indraprastha Apollo Hospital, New Delhi, with 30+ years’ experience in lung cancer surgery, chest tumors, pleural diseases, VATS, esophageal surgery and minimally invasive thoracic procedures. He is also a dedicated health writer and educator.

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पसलियों का फ्रैक्चर कैसे होता है?

आजकल छोटे छोटे वाद विवाद मारपीट को जन्म देते हैं। बात बात पर मुक्केबाजी षुरू हो जाती है जिसमें एक या दो पसलियाँ चटक जाती हैं। अक्सर लोग दुपहिया वाहन यानि मोटरसाइकिल या स्कूटर गैर जिम्मेदाराना ढंग से चलाते हुए सड़क पर गिर जाते हैं और अपनी पसलियों का फ्रैक्चर करवा लेते हैं। कभी कभी

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अगर पसलियों के फ्रैक्चर का समुचित इलाज न करायें तो क्या होगा?

अगर पसलियों के फ्रैक्चर का सही इलाज न करायें तो देर सवेर मौत निष्चित है। लोग पसलियों के फ्रैक्चर को गंभीरता से नहीे लेते और उसे मामूली चोट समझकर छोटे मोटे क्लीनिक व अस्पतालों में इलाज करवाते हैं। हमारा चिकित्सक वर्ग भी ज्यादातर पसलियों के फ्रैक्चर को उतनी गंभीरता से नहीं लेता जितना उन्हें लेना

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पसलियों के फ्रैक्चर का विकराल रूप यानि ष्फ्लेल चेस्टष्

कई बार सड़क या बस दुर्घटनाओ में कई सारी पसलियाँ एक साथ कई स्थानों में टूट जाती हैं जिसे मेडिकल भाशा में ष्फ्लेल चेस्टष् यानि झूलती हुई छाती कहते हैं। इसमें ष्फ्लेल चेस्टष् मूल छाती से अलग होकर झूलती है और अपना स्वतंत्र अस्तित्व बना लेती है। फ्लेल चेस्ट साँस लेने की प्रक्रिया में मूल

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पसलियों का फ्रैक्चर अक्सर मौत का पैगाम क्यों होता है?

छाती की लगभग 70 प्रतिषत चोटों में पसलियों में फ्रैक्चर हो जाता है और उसके साथ साथ छाती की माँसपेषियाँ क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। लगभग 50 प्रतिषत लोगों में पसली का फ्रैक्चर होने के साथ साथ छाती के अ्रदर स्थित फेफड़ा गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो जाता है जिसके परिणामस्वरूप छाती के अन्दर खून व

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सड़क दुर्घटनाएँ क्यों खतरनाक होती हैं?

यह देखा गया है कि बड़ी सड़क दुर्घटनाओं में घायल व्यक्ति अस्पताल पहुँचने के पहले ही दम तोड़ देता है। सड़क दुर्घटना में घटना स्थल पर होने वाली मौतों के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार छाती चोट है। सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में 75 प्रतिषत प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रोल छाती चोट का है। इसलिए

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स्वचालित वाहनों की बेतहाषा वृद्धि- पसलियों के फ्रैक्चर का एक महत्त्वपूर्ण कारण

आजकल के जमाने में जैसे जैसे औद्योगिकीकरण की रफ्तार तेज हो रही है उसी रफ्तार में लोगों की भागदौड़ भी बढ़ रही है। लोग षहरों में रहने की जगह मुनासिब कीमत पर न मिलने पर षहर के सीमा से सटे उपनगरों में किफायती दामों में उपलब्ध रिहायषी मकानों में पलायन कर रहे हैं। जीविकोपार्जन के

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