स्वचालित वाहनों की बेतहाषा वृद्धि- पसलियों के फ्रैक्चर का एक महत्त्वपूर्ण कारण

आजकल के जमाने में जैसे जैसे औद्योगिकीकरण की रफ्तार तेज हो रही है उसी रफ्तार में लोगों की भागदौड़ भी बढ़ रही है। लोग षहरों में रहने की जगह मुनासिब कीमत पर न मिलने पर षहर के सीमा से सटे उपनगरों में किफायती दामों में उपलब्ध रिहायषी मकानों में पलायन कर रहे हैं। जीविकोपार्जन के लिए लोग षहर के समीपवर्ती इलाकों से मुख्य षहर में काम पर आने के लिए रोजाना औसतन 1 से 4 घंटे का सफर करते हैं। इस भागदौड़ की ज़िंदगी में सड़कों पर दौड़ने वाली आटोमोबाइल्स की संख्या बढ़ना लाज़मी है। ऐसा लगता है कि अपने भारतवर्श में सारे षहरों की सड़के आटोरिक्षा, दुपहियावाहन, कार व बसों से लदी पड़ी हैं। स्वचालित वाहनों की बेतहाषा वृद्धि होने से सड़क दुर्घटनाओं की दर तेजी से बढी़ है। आजकल रोज आए दिन अखबार, रेडियो व टी. वी. पर बड़ी सड़क दुर्घटनाओं के बारे में सुनने व देखने में आता है। छोटी मोटी सड़क दुर्घटनाओं के बारे में जनता को कोई जानकारी ही नहीं होती है।

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