कई बार सड़क या बस दुर्घटनाओ में कई सारी पसलियाँ एक साथ कई स्थानों में टूट जाती हैं जिसे मेडिकल भाशा में ष्फ्लेल चेस्टष् यानि झूलती हुई छाती कहते हैं। इसमें ष्फ्लेल चेस्टष् मूल छाती से अलग होकर झूलती है और अपना स्वतंत्र अस्तित्व बना लेती है। फ्लेल चेस्ट साँस लेने की प्रक्रिया में मूल छाती के साथ कोई सहयोग नहीं करती बल्कि मूल छाती के विपरीत काम करती है। यह एक खतरनाक स्थिति है क्योंकि फ्लेल चेस्ट साँस लेने की प्रक्रिया और छाती की अन्य गतिविधियों में भयानक बाधा उत्पन्न करती है जिसका मिलाजुला परिणाम यह होता है कि रक्त में आक्सीजन की मात्रा तेजी से गिरने लगती है। अगर फ्लेल चेस्ट का तत्काल समुचित इलाज नहीं किया गया तो मरीज की मौत निष्चित है। ऐसी अवस्था में घायल व्यक्ति के परिवार के सदस्यों को चाहिए कि मरीज को तमाम सुविधाओं से युक्त किसी आधुनिक बड़े अस्पताल में ले जाकर किसी अनुभवी थोरेसिक सर्जन से इलाज करायें।

Dr. K. K. Pandey is a Senior Consultant in Thoracic & Endothoracic Surgery at Indraprastha Apollo Hospital, New Delhi, with 30+ years’ experience in lung cancer surgery, chest tumors, pleural diseases, VATS, esophageal surgery and minimally invasive thoracic procedures. He is also a dedicated health writer and educator.
