पसलियों का फ्रैक्चर अक्सर मौत का पैगाम क्यों होता है?

छाती की लगभग 70 प्रतिषत चोटों में पसलियों में फ्रैक्चर हो जाता है और उसके साथ साथ छाती की माँसपेषियाँ क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। लगभग 50 प्रतिषत लोगों में पसली का फ्रैक्चर होने के साथ साथ छाती के अ्रदर स्थित फेफड़ा गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो जाता है जिसके परिणामस्वरूप छाती के अन्दर खून व हवा भर जाती है। छाती के अन्दर हवा भरने को ष्न्यूमोथोरेक्सष् व खून भरने को ष्हीमोथोरेक्सष् कहा जाता है। इन दोनों अवस्थाओं का अगर तुरंत कारगर इलाज नहीं किया गया तो 80 प्रतिषत मामलों में मरीज की मौत होने की आषंका रहती है। इसलिए छाती चोट होने पर तुरंत किसी अनुभवी थोरेसिक सर्जन की निगरानी में इलाज षुरू कर देना चाहिए अन्यथा मौत के अलावा और कोई चारा नहीं बचेगा।

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