अगर पसलियों के फ्रैक्चर का समुचित इलाज न करायें तो क्या होगा?

अगर पसलियों के फ्रैक्चर का सही इलाज न करायें तो देर सवेर मौत निष्चित है। लोग पसलियों के फ्रैक्चर को गंभीरता से नहीे लेते और उसे मामूली चोट समझकर छोटे मोटे क्लीनिक व अस्पतालों में इलाज करवाते हैं। हमारा चिकित्सक वर्ग भी ज्यादातर पसलियों के फ्रैक्चर को उतनी गंभीरता से नहीं लेता जितना उन्हें लेना चाहिए। होता यह है कि हम सारा ध्यान पसलियों के फ्रैक्चर पर केन्द्रित करते हैं और उसी कड़ी में पसली फ्रैक्चर से पीड़ित ज्यादातर मरीज हड्डी रोग विषेशज्ञ के पास पहुँच जाते हैं। लोग यह बात नहीं समझते कि जिस व्यक्ति को पसली का फ्रैक्चर हुआ है उसमें थोड़ा या ज्यादा मात्रा में फेफड़ा जरूर ज़ख्मी हुआ होगा। इस लापरवाही का परिणाम यह होता है कि हम फेफड़े की चोट की बजाय पसली की चोट पर ज्यादा ध्यान देते हैं और फेफड़े की चोट को अनदेखा कर देते हैं। होष तब आता है जब ए. आर. डी. एस. (एक्यूट रेस्परेट्री डिस्ट्रेस सिन्ड्रोम) की अति भयानक स्थिति पैदा हो जाती है। ए. आर. डी. एस. की स्थिति आने पर जान बचने की संभावना केवल 5 प्रतिषत रह जाती है। ए. आर. डी. एस. की स्थिति में ष्वसन के साथ साथ आक्सीकरण की प्रक्रिया विफल हो जाती है जिसके परिणाम स्वरूप रक्त में आक्सीजन की मात्रा भयानक रूप से कम हो जाती है और कार्बनडाईआक्साइड की मात्रा बढ़ जाती है। इससे षरीर के अन्य अंग जैसे गुर्दे, दिमाग व जिगर काम करना बंद करने लगते हैं। छाती का एक्सरे काला दिखने की बजाय सफेद दिखने लगता है। इसलिए लोगों को चाहिए कि दुर्घटना में हुई पसलियों के फ्रैक्चर को षुरूआती दिनों में अति गंभीरता से लें और ए. आर. डी. एस. रोग को यानि यमदूत को सीधा सीधा निमंत्रण न दें।

Read more…

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Call Us Now
WhatsApp